देश का पश्चिम और पश्चिमोत्तर इलाक़ा इस समय पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों की मार झेल रहा है. सबसे ज़्यादा समस्या राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई जिलों को झेलनी पड़ रही है.

टिड्डियों के आतंक से निपटने के लिए अब केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है. टिड्डियों को मारने के लिए अब ड्रोन का इस्तेमाल करने की तैयारी हो रही है. ड्रोन के ज़रिए प्रभावित इलाक़ों में टिड्डियों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए कृषि मंत्रालय को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की मंज़ूरी इस शर्त पर मिल गई है कि इसमें केवल सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियां ही इस्तेमाल की जाएंगी. अबतक इस काम के लिए दो एजेंसियों का चयन भी किया जा चुका है जबकि बाक़ी के चयन के लिए ई नीलामी की जा रही है. ड्रोनों का इस्तेमाल ख़ासकर बड़े बड़े पेड़ों और उन इलाकों में फ़ैल टिड्डियों पर किया जाएगा जहां पहुंचना मुश्किल काम है.

यूके से 60 स्प्रेयर मंगाने को मंज़ूरी

इसी के साथ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्प्रेयर की संख्या बढ़ाने का फ़ैसला करते हुए यूके की कम्पनी मेसर्स माइक्रोन से 60 अतिरिक्त स्प्रेयर मंगाने को मंज़ूरी दी है. फ़िलहाल 47 स्प्रेयर इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं. अभी तक राजस्थान के 21 , मध्य प्रदेश के 18 , गुजरात के 2 और पंजाब के 1 जिलों में टिड्डियों पर क़ाबू पाने का अभियान चलाया जा रहा है. इसके लिए कीटनाशकों की कमी न हो इसके लिए पर्याप्त स्टॉक तैयार किया जा रहा है जिसमें 53000 लीटर मैलाथियान शामिल है. सबसे बुरी हालत राजस्थान की है. इसे देखते हुए स्प्रेयर लगे हुए 800 ट्रैक्टर और कीटनाशक ख़रीदने के लिए राज्य को क़रीब 18 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं .

सरकार ने टिड्डी प्रभावित इलाकों के लिए 200 लोकस्ट सर्किल ऑफिसर की नियुक्ति भी की है जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर उन सभी इलाकों की निगरानी और सर्वे कर रहा है जहां जहां टिड्डियों का हमला हुआ है. अभी तक राजस्थान , मध्यप्रदेश , गुजरात और पंजाब के 303 जगहों की 47308 हेक्टेयर ज़मीन पर टिड्डियों पर नियंत्रण का काम पूरा हो चुका है. इसके लिए अबतक 89 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का भी इस्तेमाल किया जा चुका है.

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