नई दिल्ली:- वैसे तो आज तक हमने गिरगिट को ही रंग बदलते हुए देखा है, लेकिन ये पहली बार सुना है कि एक मछली अपनी रंगे बदलती हो। जी हां ये बिल्कुल सच है। देश में पहली बार एक ऐसी दुर्लभ प्रजाति की मछली मिली है, जो रंग बदलने में माहिर है। यह जहरीली स्कॉर्पियन फिश शिकार करने और अपना बचाव करने के लिए तुरंत अपना रंग बदल लेती है। इस रंग बदलने वाली मछली को सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट  के वैज्ञानिकों ने खोजा है। इस मछली का नाम स्कॉर्पियनफिश है। साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह मछली अपनी की रीढ़ की हड्डी में जहर को स्टोर कर के रखती है। गंभीर स्थिति में ये अपना रंग बदलने में इसका उपयोग करती है।स्कॉर्पियन फिश का वैज्ञानिक नाम र्पिनोस्पिसिस नेगलेक्टा है। इसकी खासियत यह है कि ये अपना रंग मात्र 4 सेकेंड में ही बदल लेती है। यह बहुत ही जहरीली होती है। इसके सेंसरी ऑर्गन पूंछ में होते हैं जो बहुत ही तेज होते हैं। सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट के डॉ. जेयाबास्करन ने बताया स्कॉर्पियनफिश को मन्नार की खाड़ी में पाया गया है जिस समय इसे देखा गया यह घास में छिपी हुई थी। इस तरह की फिश की खोज देश में पहली बार की गई है।

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