पंजाब में नए कृषि बिल के विरोध में आज रेल रोको आंदोलन शुरु हुआ है. वहीं किसान संगठनों ने भारत बंद बुलाया है. कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को किसान विरोधी बताते हुए अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की बात कही है.

नई दिल्लीः संसद में पारित हुए कृषि बिलों के खिलाफ देश भर में आज किसानों ने भारत बंद बुलाया है. बिल के विरोध में किसानों के साथ-साथ विपक्षी पार्टियां भी प्रदर्शन में हिस्सा ले रही हैं. इसके साथ ही पंजाब में किसान रेल रोको आंदोलन को भी शुरू कर चुके हैं.

पारित हुए नई कृषि बिल का समर्थन करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों का भगवान बताया है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को किसान विरोधी बताते हुए अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की बात कही. इस कृषि बिल के खिलाफ हजारों किसान सड़कों पर उतर आए हैं. आइए जानते हैं आखिर क्यों हो रहा है यह प्रदर्शन

न्यूनतम समर्थन मूल्य के खत्म होने का डर

किसानों के आंदोलन का सबसे कारण नए कृषि बिल के आने के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के खत्म होने का है. अब तक किसान अपनी फसल को अपने आस-पास की मंडियों में सरकार की ओर से तय की गई MSP पर बेचते थे. वहीं इस नए कृषि बिल के कारण सरकार ने कृषि उपज मंडी समिति से बाहर कृषि के कारोबार को मंजूरी दे दी है. इसके कारण किसानों को डर है की उन्हें अब उनकी फसलों का उचित मुल्य भी नहीं मिल पाएगा.

राजस्व खत्म होने का डर

पंजाब और हरियाणा में इस कृषि बिल का विरोध सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. इन राज्यों में सरकार को मंडियों से काफी ज्यादा मात्रा में राजस्व की प्राप्ती होती है. वहीं नए कृषि बिल के कारण अब कारोबारी सीधे किसानों से अनाज खरीद पाएंगे, जिसके कारण वह मंडियों में दिए जाने वाले मंडि टैक्स से बच जाएंगे. इसका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है.

सरकार और बिल के बीच असमंजस

केंद्र सरकार अपने बयानों में कह रही है कि वह एमएसपी जारी रखेगी, इसके साथ ही देश में कहीं भी मंडियों को बंद नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन सरकार इसी बात को अपने नए बिल में नहीं जोड़ रही है. जिससे किसानों में भारी मात्रा में असंतोष और असमंजस की स्थिती बनी हुई है.

केंद्र सरकार अगर एमएसपी जारी रखने और मंडियों को बचाए रखने की बात अपने बिल में जोड़ती है, तो निकट भविष्य में ऐसा नहीं होने पर सरकार को कोर्ट का भी सामना कर सकता है. वहीं इसे बिल में नहीं जोड़ने पर देश के किसानों का केंद्र सरकार पर भरोसा कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है.


बाजार के हवाले होगा किसान

नए कृषि बिल में सरकार ने जिस व्यवस्था को जोड़ा है. उसमें कारोबारी किसान से मंडी के बाहर अनाज खरीद सकता है. अभी तक मंडी में किसान से अनाज की खरीद पर व्यापारी को 6से 7 प्रतिशत का टैक्स देना होता था. वहीं मंडी के बाहर अनाज की खरीद पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होगा. इससे अने वाले समय में मंडियां पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी और किसान सीधे तौर पर व्यापारियों के हवाले होगा. उसे उनकी फसल पर तय दाम से ज्यादा या कम भी मिल सकता है.

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