जालंधर(विनोद बिंटा)- महानगर में आजकल एक वह कहावत सच होती हुई नजर आ रही है, कौवा चला हंस की चाल। आजकल के दौर में छुट भैया नेता और नेताओं को पत्रकार बनने की होड़ लगी हुई है। आखिर यह नेता पत्रकार बन कर क्या साबित करना चाहते हैं। आम जनता का नेताओं से पहले ही विश्वास उठ चुका है और इन नेताओं के दावों को जनता हर तरह जानती है की नेताओं के वादे हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और जैसे होते हैं। लेकिन आजकल आम जनता की निगाहों में यह नेता लोग पत्रकारिता का मुखौटा पहन कर क्या साबित करना चाहते हैं। आजकल एक लहर सी ही महानगर में उठ गई है, छूट भैया नेता वह भी पत्रकारिता की ओर जा रहा है और नेता लोग भी पत्रकार बनने में लगे हुए हैं, कई नेताओं ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर अपनी पत्रकारिता दिखानी शुरू कर दी है। लेकिन आज के युग में आम जनता जागरूक हो चुकी है। आम जनता झूठ और सच्च को आजकल अच्छी तरह पहचानती है। यह नेता लोग वह कहावत अपने मियां मुंह मिट्ठू बनने वाली लोगों का दुख दर्द आम जनता के सामने लाएंगे, यह नेता लोग जो आए कल पत्रकार बन रहे हैं, वह तो अपने आप को ही जनता के सामने पत्रकार बन कर पेश करेंगे, नेतागिरी के साथ-साथ पत्रकारिता भी करेंगे। जिस तरह प्रशासन के आगे नेतागिरी का दबदबा तो नहीं चला, लेकिन वह अब नेतागिरी के साथ-साथ पत्रकार बन कर अपना दबदबा कायम रखना चाहते हैं। जिस किसी को पत्रकारिता के बारे में ए.बी.सी का मतलब भी नहीं पता वह भी पत्रकार बनने की ओर चल पड़ा है। जो लोग नेतागिरी से पत्रकार की ओर बढ़ रहे हैं उनका रिजल्ट आने वाले दिनों में ही पता चल जाएगा। जिस जनता को बेवकूफ बनाने के चक्कर में यह लोग लगे हैं यही जनता इनको इन लोगों को सही रास्ता दिखाएगी। फिर तो वही कहावत सच होगी कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का। नेतागिरी भी हाथ से जाएगी और पत्रकारिता की ए.बी.सी ना पता होने के कारण वह भी चेहरा उन नेताओं का जो आजकल पत्रकार बनने के चक्कर में लगे हुए। जिसे आम जनता नेता के तौर पर जानती है,वह जनता उन लोगों को पत्रकार कैसे मानेगी। क्योंकि आज के युग में नेता के बारे में तो हर कोई भलीभांति जानता ही है।

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