नई दिल्ली : केंद्र सरकार के कृषि कानून का विरोध करते हुए पंजाब और हरियाणा के किसान आज से दिल्ली में महाधरना देने जा रहे हैं। कांग्रेस शासित पंजाब के हजारों किसान हरियाणा बॉर्डर पर जमा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ‘दिल्ली मार्च’ के लिए निकले किसान खाने-पीने के सामान और कपड़े लेकर आ रहे हैं। किसानों की मंशा है कि वे या तो ट्रैक्टर में रात गुजारेंगे या फिर नेशनल हाईवे के किनारे बनें कैंपों में ठहरेंगे। ऐसे में दिल्ली सीमा पर पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है। इसके साथ ही फरीदाबाद और पलवल में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सरकार ने अपील की कि दो दिन तक दिल्ली बॉर्डर की तरफ जाने से बचें। इस बीच दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से किसी भी संगठन को दिल्ली में मार्च करने, विरोध-प्रदर्शन या रैली करने की अनुमति देने से इनकार किया है। गुरुग्राम और फरीदाबाद बॉर्डर पर सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं।किसान आंदोलन के चलते दिल्ली मेट्रो की छह लाइनों पर सेवाएं प्रभावित हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर कृषि कानून को न तो वापस लिया जाएगा और न ही उसमें कोई फेरबदल किया जाएगा। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। वहीं किसान आंदोलन को देखते हुए जिले में धारा-144 लगा दी गई है। किसानों को रोकने के लिए 19 ड्यूटी मजिस्ट्रेट लगाए गए हैं। दिल्ली  जाने वाले वाहनों की सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने चेकिंग शुरू कर दी, जिससे नेशनल  हाईवे 44 पर दो किमी लंबा जाम लग गया। प्रशासन का मानना है कि 26 व 27 नवंबर  को नेशनल हाईवे पर हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं, इसलिए रूट डायवर्ट किया गया है। दिल्ली से चंडीगढ़ जाने से लेकर सोनीपत से दिल्ली जाने के लिए अलग से रूट तय किया गया है। 

Jalandhar News

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