जालंधर(विनोद बिंटा)– महानगर में कोरोना वायरस की चपेट में लोग आ रहे हैं। जिसकी गिनती लगातार बढ़ रही है। जिस इलाके में कोरोना वायरस का मरीज मिल जाता है, उसके बाद टैस्ट करवाने के लिए गली-मोहल्ले के लोग और कोरोना की चपेट में आए व्यक्ति के परिवार वालों को भी कोरोना टैस्ट करवाने के लिए सेहत विभाग की टीम एंबुलेंस के माध्यम से सिविल अस्पताल लेकर जाती है। जो लोग कोरोना टेस्ट करवाने के लिए सिविल अस्पताल एंबुलेंस के माध्यम से ले जाए जाते हैं, उनका टेस्ट होने के बाद कोई भी वाहन उन्हें घर छोड़ने के लिए जा रहा है। महानगर में कर्फ्यू के दौरान कोई भी यातायात साधन लोगों को घर पर जाने के लिए नहीं मिल रहा है। जिस कारण लोगों को अपने घरों तक जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पढ़ रहा है। प्रशासन की ओर से भी कोरोना टेस्ट करवाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम किया गया है।लेकिन जो लोग अपना टेस्ट करवा देते हैं उन लोगों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए जूझना पढ़ रहा है। इसकी ताजा उदाहरण यह है कि वेस्ट हलके के शिवाजी नगर में अजय कुमार की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। जिसके चलते उसके 3 बच्चों, उसकी पत्नी और उसके रिश्तेदारों को टेस्ट करवाने के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया था। लेकिन टेस्ट होने के बाद ना तो उन्हें घर वापस जाने के लिए साधन मिला और न ही किसी सरकारी गाड़ी की मदद, प्रशासन को चाहिए कि जो लोग टेस्ट करवाने के लिए सिविल अस्पताल में ले जाए जाते हैं, उन्हें घर वापिस भेजने के लिए भी कोई इंतजाम करना चाहिए। कर्फ्यू के दौरान बिना किसी काम बाहर घूमने वाले लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर रोज कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। जिन गली-मोहल्लों में यह केस बढ़ रहे हैं, उसके बाद गली मोहल्ले के लोगों और कोरोना की चपेट में आए लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए प्रशासन के द्वारा जो बार-बार लोगों से घरों के अंदर रहने की अपील की जा रही है, उसे माने और अपने घरों के अंदर ही रहे।

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