जालंधर(विनोद बिंटा)- इस भयानक कोरोना महामारी के समय लोगों को बचाने की जगह पंजाब के मंत्री और अफसर आपस में लड़ते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से ही चीफ सेक्टरी को लगाया गया था पर आज उस पर ही मंत्रियों की गुंडागर्दी देखने को मिली है। यहां सरकार और राज्य के मुख्य सचिव आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब मंत्रिमंडल ने मुख्य सचिव करन अवतार सिंह की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें मुख्य सचिव पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ “दुर्व्यवाहर” का आरोप लगाया गया और प्रस्ताव पास किया गया है कि यदि मुख्य सचिव किसी भी कैबिनेट बैठक को आयोजित करेंगे तो वे उसमें हिस्सा नहीं लेंगे। जे पंजाब के इतिहास में पहली बार हुआ है कि कांग्रेसी नेताओं ने अपने लाभ के लिए उस पर दबाव बनाया है । पिछले तीन-चार साल से कांग्रेसी विधायक व मंत्री अपने लाभ के लिए अफसरों को इस्तेमाल कर रहे हैं और तीन-चार सालों से पंजाब सरकार का हजारों करोड रेवेन्यू घटा है, इससे यह साबित होता है कि सारी की सारी कमाई इनकी जेबों में चली गई है।गैर कानूनी शराब बेचकर इन्होंने शराब के कारखानों से बिना एक्साइज से शराब निकालकर अवैध शराब जनता को बेची है। इसका सबूत पंजाब में लॉकडॉन में दिन रात शराब बेची है और करोड़ों रुपए सरकार को नुकसान पहुंचाया है और अपनी जेब भरी है। यह बहुत दुखदाई बात है अगर कहा जाए कि कांग्रेस के सभी लीडर जनता को लूटने और कूटने में लगे हुए हैं । इसलिए गवर्नर साहब को चाहिए के इसकी सीटिंग जज से इंक्वारी करवाई जाए के प्रदेश को कितना नुकसान हुआ है ,जो कांग्रेसी मंत्रियों ने चीफ सेक्टरी को धमकाया है ,वह क्यों धमकाया है? ये उनसे क्या फायदा चाहते थे, जो उसने नहीं होने दिया, इसकी जांच हो।

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