जालंधर(विनोद बिंटा)- पंजाब सरकार की और से लॉटरी के साथ साथ सट्टेबाजी के धंधे पर भी रोक लगी हुई है।लेकिन इसके बावजूद भी जालंधर सट्टा माफिया का गढ़ बन चुका है। सट्टा माफिया के लोगों ने लॉटरी की आड़ में सट्टेबाजी की धंधा और दिल्ली, गली, हैदराबाद अन्य न जाने कैसे मटके के सट्टेबाजी में अपना पूरा सम्राज्य कायम कर के रखा हुआ है। सट्टेबाजों के जाल की तारें महानगर की गली- गली में बिछी हुई है। राजनीति सरंक्षण और पुलिस की कुछ काली भेंडों के सरंक्षण के चलते सट्टा माफिया के होंसले बुलंद हो रहे है।जिस कारण महानगर सट्टेबाजी का गढ़ बन चुका है। हर रोज करोड़ों रुपयों का सट्टेबाजी का धंधा खुलेआम हो रहा है। लेकिन सट्टेबाजी के धंधे में दुकानदारों पर हर वक्त डर का साया सताता रहता है।इस धंधे की कमाई से लाखों रुपए बांटने के बावजूद भी डर का साया उन पर छाया रहता है। इसी डर के चलते कुछ दिनों से महानगर के सट्टेबाजों ने अपना धंधा समेट कर दुकानों को ताले जड़े हुए है। वही बस्ती अड्डा मच्छली मार्किट में मशहूर सट्टेबाज ने अपने पांव लंबे वर्षों से जमाए हुए है। वही यहां एक तरफ महानगर के सट्टेबाजों ने अपना धधा समेटा हुआ है। थाना 4 के इलाके मच्छली मार्किट में खुलेआम आज भी सट्टेबाजी का धंधा चल रहा है। कोरोना महामारी के चलते आज भी इन दुकानों पर सैंकड़ों लोगों की बिना मास्क पहने भीड़ का जमावड़ा लगा हुआ है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि इस तरफ ध्यान दें।

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